Tuesday, 29 October 2013


राजेंद्र यादव का महाप्रयाण एक युग का महाप्रस्थान होना है।यह
साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है।
राजेन्द्र जी अदभुत थे ,...........अदभुत ......
,आज हिंदी साहित्य का एक मसीहा चला गया।
 जिसने जीवन में कभी
अवसान नहीं देखा
,अब वह लौट कर नहीं आएगा .....
हिंदी साहित्याकाश का एक सिताराआज  गर्दिशों में खो गया ....
जो अब नहीं दिखेगा ......कभी ......इन  नजरों से ,.......
 अर्य सन्देश पत्रिका परिवार
और,
'भारतीय लेखक समाज'  की
विनम्र श्रद्धांजलि ....

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